सकारात्मक सोच की ताकत – आपकी सोच आपकी मंजिल तय करती है

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“आदमी अपनी सोच से बनता हैं, वो जैसा अपने बारे में सोचता हैं वो वैसा ही बन जाता हैं” – महात्मा गाँधी

यह बिल्कुल सच हैं कि जैसा हम अपने बारे में सोचते हैं वैसा ही हम बन जाते हैं। अगर आप सोचते हो कि आप successful हो सकते हो तो आप एक दिन जरूर successful बनोगे। और अगर आप सोचते हो कि आप successful नहीं हो सकते तो आप कभी successful नहीं हो पाओगे क्योंकि आपकी journey आपकी सोच (Thinking) से ही शुरू होती हैं।

एक research के मुताबिक एक normal person के दिमाग में 24 घंटों में 60,000 Thoughts (विचार) आते हैं। मगर ये ताज्जुब की बात नहीं हैं, दरअसल ताज्जुब की बात ये है कि जो Thoughts (विचार) आज आपको आए हैं उसमें से 90% कल repeat होंगे। मतलब ये हैं कि अगर आज आपकी सोच positive हैं तो कल भी positive ही रहेगी और अगले कई दिनों तक आप positive रहोगे। इसी तरह अगर आज आप negative सोच रहे हो तो अगले कई दिनों तक negative रहने वाले हो।

अब सीधी सी बात हैं कि positive सोच के साथ किये जाने वाले काम का result भी positive ही होगा और negative सोच के साथ किये जाने वाले काम का result हमेशा negative ही होगा। इसलिये ये बहुत ही जरूरी हैं कि हम अपनी thinking को बदले तभी हमारी मंजिल भी बदलेगी।

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जैसे कि मेरी आदत है कि हर बात को समझाने के लिए मैं एक example देता हूँ। इस बात को भी मैं एक example से समझाता हूँ। हुआ यू कि एक company जिसका shoes manufacturing (जूते बनाने) का काम था। उस company में दो marketing executives को appoint किया गया और उनको एक island (द्वीप) पर जूतों की marketing के लिए भेजा गया।

वे दोनों दो दिन तक उस द्वीप पर रहे, लोगों से मिले और जूतों की marketing की। दो दिन बाद दोनों ने अपनी अपनी marketing की report बनाकर बॉस को email करदी। एक की report जैसे ही बॉस ने पढ़ी तो उसे तुरंत reply भेजा कि आपको जॉब से निकाला जाता हैं कल से जॉब पर आने की जरूरत नहीं हैं। जब बॉस ने दूसरे की report पढ़ी तो reply किया कि congratulations आज से हम आपको marketing head बनाते हैं और आपकी salary भी double करते हैं।

अब सवाल ये हैं कि आखिरकार उन्होंने report में ऐसा क्या लिखा कि एक को तो जॉब से निकाला गया और दूसरे को promotion मिला? तो आइए आपको बताते हैं कि जिसको जॉब से निकाला गया था उसने अपनी report में लिखा कि “Sir, जब हम इस द्वीप पर पहुंचे तो हमें पता चला कि यहाँ पर कोई भी इंसान जूते पहनता ही नहीं हैं और नाहीं जूतों के बारे में कुछ समझता हैं इसलिए sorry यहाँ पर हम जूते नहीं बेच पाएंगे”।

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इस पर बॉस ने reply किया कि “तुम्हें जूते बेचने के लिए appoint किया है और जिस काम के लिए तुम्हें रखा हैं अगर तुम वही नहीं कर सकते तो तुम किसी काम के नहीं इसीलिए तुम्हें जॉब से निकाला जाता हैं”।

और जिसको promotion मिला था उसने अपनी report में लिखा था कि “Sir, मुझे ये बताते हुए बहुत ही खुशी हो रही है कि इस द्वीप पर कोई भी इंसान जूते नहीं पहनता हैं इसलिए मुझे लगता हैं कि हमारी company के ज़्यादातर जूते यही पर बिक जायेंगे।

आप जरा गौर करें कि situation एक हैं उस द्वीप पर कोई भी जूते नहीं पहनता हैं, पर दो लोगों कि एक ही situation में दो अलग अलग सोच हैं, एक कि सोच negative हैं वही दूसरे कि सोच positive हैं।

और आप यहाँ पर सोच का power देखें, अभी दोनों ही marketing executives में से किसी ने भी जूते बेचे नहीं हैं सिर्फ़ अपनी अपनी सोच बताई हैं। और सिर्फ़ सोच के आधार पर उनको result भी मिल गया, अभी action तो किया ही नहीं। negative thinking की वजह से एक को जॉब से निकाला गया और positive thinking की वजह से दूसरे को promotion मिला और salary भी double हो गई।

इसीलिए तो मैंने कहा कि हमारी journey हमारी thinking से start होती हैं, अगर thinking positive हैं तो life भी positive होगी और अगर thinking negative हैं तो life भी negative होगी। इसलिए अपनी सोच को बदलिए, मंजिल अपने आप बदल जायेगी।

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2 Comments

  1. PANKAJ KUMAR GAUTAM February 10, 2017
  2. rajesh February 1, 2017

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