क्या वजह है कि महनत के बावजूद मोहन सफल नहीं हो पाया – एक कहानी

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क्या आप कठिन परिश्रम करते है? जरा अपने आस-पास में देखे आपको ऐसे बहुत लोग मिल जायेगे जो आपसे भी ज्यादा महनत करते है पर आपसे कम सफल है.

आपको ऐसे भी लोग मिल जायेगे जो आपसे भी कम महनत करते है पर जिंदगी में आपसे भी ज्यादा सफल है.

तो ऐसी क्या वजह है कि वो लोग ज्यादा सफल हो जाते है जो कम महनत करते है जबकि बात तो असल में की जाती है कि महनत करने वाले लोग ही आगे जाते है और सफल होते है.

मित्रो इस बात को सही से और अच्छे तरीके से समझने के लिए मैं एक कहानी का इस्तेमाल करूँगा, यह कहानी पढ़ कर आपको इस बात का जवाब मिलेगा कि महनत के अलवा भी ऐसा क्या जरुरी है जो आपको कामयाबी की तरफ लेकर जाती है.

एक गाँव में मोहन नाम का लड़का होता है, जिसको पढाई में कोई भी रूचि नहीं होती है. वो कभी विद्यालय नहीं गया तो इस कारण बड़ा होकर कुछ ढंग का कर नहीं पता है, जिस वजह से वो ऐसे काम में लग जाता है जहा पर पेड़ काटने का काम होता है.

फिर मोहन दुसरे दिन कुल्हाड़ी की धार तेज़ कर काम को निकलता है, और अपने सेठजी को खुश करने के लिए एक ही दिन में 20 पेड़ काट लेता है.

सेठजी को बोलता है देखो मैंने एक ही दिन में इतने पेड़ काट दिए है, और सायद ही आपके व्यापर में कोई कर्मचारी होगा जिसने एक ही दिन में इतने पेड़ काटे होगे.


सेठजी बड़ा खुश होता है, और बोलता है कि अरे वाह..!! मोहन तुम तो बहुत महंती इन्सान हो, मैं तुम्हारी महंताना सबसे ज्यादा रखुगा.

इस तरह से लालची मोहन सोचता है, की जिस तरह से 20 पेड़ काटे है उसी तरह दुसरे दिन उससे ज्यादा पेड़ काटने की कोशिश करुगा जिससे मेरा सेठ खुश होकर मेरी कमाई में और बढोतरी कर देगा.

तो उसी तरह अनपढ़ मोहन दुसरे दिन अपने 20 से ज्याद पेड़ काटने के जूनून के साथ कुल्हाड़ी को लेकर निकलता है.

तो होता है यह है कि वो दुसरे दिन केवल 18 पेड़ ही काट पाता है, जूनून कल से ज्यादा, महनत कल से ज्यादा, समय भी कल से ज्यादा लगा दिया तो फिर पेड़ काटने की संख्या बढ़ने के बजाये घटी क्यों?

तो मोहन तीसरे दिन फिर आता है, और अपने जूनून, महनत, समय और ज्यादा लगा देता है लेकिन तीसरे दिन केवल 15 ही पेड़ काट पाता है.

और इस तरह 7 दिन तक चलता है और एक दिन यह आता है कि मोहन केवल 5 पेड़ ही काट पता है.

परेशान मोहन सेठजी से पूछता है कि सेठजी ये मेरे साथ में क्या हो रहा है? कि जब में पहले दिन आया था तब मैंने इतनी महनत नहीं की थी फिर भी मैं 20 पेड़ काट पाया, पर दुसरे दिन उससे ज्यादा महनत करने पर कम पेड़ क्यों काट पाया? और दिसरे दिन उससे कम और ऐसे करके जैसे-जैसे मैं अपनी महनत करने की क्षमता बढाता गया, वैसे ही पेड़ कम क्यों कटे?

बुद्धिमान सेठजी पूछता है कि मोहन मुझे यह बताओ कि तुमने अपनी कुल्हाड़ी को आखिरी बार कब धार की थी?

मोहन कहता है कि सेठजी केवल तब जब मैं पहले दिन आया था, तो सेठजी बोलता है कि यही कारण है, तुम अपनी महानत करने की क्षमता को तेज़ कर रहे हो परन्तु अपनी धार नहीं.

जैसे ही तुम अपनी धार पहले दिन तेज़ करके आये थे, तुमने भले ही कम महनत की पर तुमने 20 पेड़ काटे, और जैसे ही तुम्हारी धार कमजोर हो होती गई तुम महनत करते गए लेकिन परिणाम नहीं मिला.

सिक्षा – मित्रो मोहन की तरह हम सब महनत तो कर रहे है पर अपनी स्किल, नॉलेज, ज्ञान, सूचना, व्यवहार आदि को हम अपडेट नहीं कर रहे है उसे धार नहीं दे रहे है, यानी तैयारी पूरी नहीं कर रहे है, पहले आपको अपनी धार तेज़ करनी होगी फिर आपको मैदान में उतरना होगा, और इस तरह से ही आपको हर बार धार को तेज़ करते ही जाना होगा.

“किसी वृक्ष को काटने के लिए आप मुझे छः घंटे दीजिये और मैं चार घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज़ करने में लगाऊंगा.” – अब्राहम लिंकन

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